रामनाथी (गोवा) के सनातन आश्रम में हंगरहळ्ळी (कर्नाटक) की श्री विद्याचौडेश्‍वरी देवी का मंगलमय वातावरण में शुभागमन !

जय दुर्गे दुर्गति परिहारिणी । शुम्भ विदारिणी माता भवानी ॥ ब्रह्मानंद चरण मे आये । भव भय नाश करो महारानी ॥

हिन्दवी स्वराज्य स्थापना हेतु माता श्री भवानीदेवी ने छत्रपति शिवाजी महाराज को बल प्रदान किया था । वर्तमान काल में रामराज्य की अनुभूति देनेवाले हिन्दू राष्ट्र की स्थापना हेतु श्री विद्याचौडेश्‍वरी स्वयं सनातन के रामनाथी आश्रम में पधारी हैं, जो दैवीय संयोग है ! सनातन संस्थापर श्री विद्याचौडेश्‍वरी देवी का कृपाछत्र सदैव बना रहे, यह उनके चरणों में प्रार्थना !

कर्नाटक की श्री विद्याचौडेश्‍वरीदेवी

जो शक्ति चराचर में व्याप्त है, उस शक्ति के योग से समस्त विश्‍व संचालित होता है, उस आदिशक्ति के चरणों में वंदन !

रामनाथी (गोवा) : भक्त की पुकार का तुरंत प्रत्युत्तर करनेवली, उसपर कृपा की वर्षा करनेवाली, कभी वत्सलमय, तो कभी रौद्र रूप धारण कर भक्तों का उद्धार करनेवाली आदिशक्ति का ६ नवंबर को यहां के सनातन आश्रम में शुभागमन हुआ !

सनातन आश्रम की ओर मार्गस्थ श्री विद्याचौडेश्‍वरीदेवी की शोभायात्रा

हिन्दू राष्ट्र स्थापना के कार्य में उत्पन्न सभी बाधाएं दूर होने हेतु कर्नाटक के तुमकुर जनपद के हंगरहळ्ळी (तहसील कुणीगल) की श्री विद्याचौडेश्‍वरी देवी का यहां के सनातन आश्रम में मंगलमय वातावरण में शुभागमन हुआ ।

श्री श्री श्री बालमंजुनाथ स्वामीजी

पारपतिवाडा (बांदोडा) से ‘जय भवानी’, ‘जय अंबे’ का जयघोष करते हुए देवी की शोभायात्रा निकाली गई । देवी की मूर्ति लेकर मंदिर के महंत श्री श्री श्री बालमंजुनाथ स्वामीजी ने वेदमंत्रों के जयघोष में अपने भक्तगणों के साथ आश्रम में सायंकाल ५.५० बजे प्रवेश किया ।

श्री विद्याचौडेश्‍वरीदेवी का औक्षण करती हुईं सद्गुरु (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी तथा बाजू में महंत श्री श्री श्री बालमंजुनाथ स्वामीजी

अत्यंत शारीरिक कष्ट होते हुए भी परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी ने देवी के दर्शन किए । सनातन संस्था की सद्गुरु (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी ने शोभायात्रा के आरंभ में देवी को माल्यार्पण किया । देवी के स्वागत के लिए सनातन संस्था के संत, साधकोंसहित एस्.एस्.आर्.एफ्. के साधक भी पारंपरिक वेशभूषा में उपस्थित नमस्कार की मुद्रा में खडे थे । आगमन के पश्‍चात आश्रम में देवी की चलस्थापना की गई । तत्पश्‍चात पुरोहितों ने सप्तशति का पाठ किया ।

स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात