कतरास (झारखंड) में सनातन संस्था की ओर से व्यावसायिकों के लिए ‘साधना’ विषयक व्याख्यान

व्यावसायिकों को मार्गदर्शन करते हुए बाईं ओर से पू. प्रदीप खेमकाजी एवं श्री. शंभू गवारे

कतरास (झारखंड) : हिन्दू जनजागृति समिति के पूर्वोत्तर राज्य समन्वयक श्री. शंभू गवारे ने यहां के व्यावसायिकों के साथ संपन्न हुई बैठक में ऐसा प्रतिपादित किया कि, व्यवसाय करते समय साधना और धर्माचरण करने से व्यवसाय के माध्यम से भी साधना होगी ! साधना करने से जीवन में मूलरूप से बदलाव आते हैं ! साधना के संदर्भ में जानकारी देने के पश्‍चात श्री. गवारे ने महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय की संकल्पना के संदर्भ में उपस्थित व्यावसायिकों को अवगत कराते हुए कहा कि, हमारी महान भारतीय संस्कृति में १४ विद्याएं और ६४ कलाएं बताई गई हैं, जो संपूर्ण विश्‍व के लिए मार्गदर्शक हैं !

इस बैठक में यहां के सनातन संस्था के संत पू. प्रदीप खेमकाजी की वंदनीय उपस्थिति रही। उन्होंने उपस्थित व्यावसायिकों को ‘जीवन में साधना का महत्त्व’, ‘कौनसा नामजप करना चाहिए’ आदि विषयों पर मार्गदर्शन किया और कहा कि साधना के कारण अनेक व्यावसायिकों की समस्याएं दूर होने के साथ उनकी आध्यात्मिक उन्नति भी हुई है !

उपस्थित व्यावसायिकों ने विषय सुनने के पश्‍चात अपना मत व्यक्त करते हुए कहा कि, हम भी साधना करेंगे; किंतु हमें नियमितरूप से मार्गदर्शन और सत्संग की आवश्यकता है ! बैठक के पश्‍चात हर मास के २ गुरुवार के दिन धर्मशिक्षावर्ग आरंभ करने का सुनिश्‍चित किया गया। व्यावसायिकों ने ऐसा भी कहा कि वे उनके अन्य सहव्यावसायिक मित्रों को भी इस संदर्भ में बताएंगे !

स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात

Donating to Sanatan Sanstha’s extensive work for nation building & protection of Dharma will be considered as

“Satpatre daanam”