तृप्ती देसाई शबरीमला मंदिर जाने का ‘पब्लिसिटी स्टंट’ करने के पूर्व केरल की नन पर बलात्कारके आरोपी बिशप को सबक सिखाने की हिम्मत दिखाएं !

प्रति,
मा. संपादक/मुख्य पत्रकार

तृप्ती देसाई स्वयं को कानून माननेवालीं और भगवान की भक्त कहलाती हैं; यह सबसे बडा विनोद है । जो तृप्ती देसाई संविधान का आदर करने की डींगें हांकती हैं, वे ही मंदिर के न्यासियों को पीटूंगी, ऐसी घोषणा करती हैं । जो भक्ति का ‘स्टंट’ करती हैं, वे ही अन्यों की भक्ति और श्रद्धा का तथा धर्मपरंपराआें का अपमान करती हैं । केवल इतना ही नहीं, कुछ दिन पूर्व उन पर पुणे में एक व्यक्ति को पीटकर जातिवाचक शब्द का उपयोग करने के प्रकरण में ‘एट्रॉसिटी’ का तथा उस व्यक्ति की सोने की चेन एवं 27 सहस्र रुपए वसूलने का आरोप है । इस प्रकरण में न्यायालय ने भी उनकी जमानत अस्वीकार कर दी है । ऐसी गुंडागिरी और जातीयता फैलानेवाली तृप्ती देसाई अब हिन्दुआें की धार्मिक भावनाएं आहत करने के लिए तथा केरल का धार्मिक सौहार्द्र बिगाडने के लिए शबरीमला मंदिर जाने का ‘पब्लिसिटी स्टंट’ करने निकली हैं । यदि उन्हें केरल के शबरीमला मंदिर में जाकर ‘मंदिरप्रवेश न मिलने के कारण महिलाआें पर होनेवाला कथित अन्याय’ दूर करना है, तो वे प्रथम केरल की बलात्कार पीडित नन से मिलें, उसे सहानुभूति दर्शाएं और उस पर बलात्कार करनेवाले बिशप फ्रैंको मुलक्कल को सबक सिखाने की हिम्मत दिखाएं । तभी वास्तविक अर्थों में महिलाआें पर हो रहे अन्याय के विरोध में तृप्ती देसाई कार्य करती हैं, ऐसा कहा जा सकता है, ऐसा सनातन संस्था की प्रवक्ता श्रीमती नयना भगत ने कहा है ।

तृप्ती देसाई ने आज तक महाराष्ट्र के शनिशिंगणापूर स्थित श्री शनिदेव का चौथरा, श्रीक्षेत्र त्र्यंबकेश्‍वर और श्री महालक्ष्मी मंदिर के गर्भगृह में महिलाआें के प्रवेश पर प्रतिबंध की परंपरा ध्वस्त कर, धर्मद्रोह किया है । भले ही न्यायालय ने निर्णय दिया है और तृप्ती देसाई जैसे लोग कथित आधुनिकतावाद के नाम पर कार्य करनेवाले धर्मद्रोही परंपराएं तोड रहे हैं; तब भी धर्म के प्रति श्रद्धा रखनेवालीं माता-बहनें आज भी भक्तिभाव से धर्मपरंपराआें का पालन करती हैं । यह श्रद्धा की ही जीत है, ऐसा भी श्रीमती भगत ने कहा ।

आपकी नम्र,
श्रीमती नयना भगत,
प्रवक्ता, सनातन संस्था.