मुंबई में कुछ मूर्तिकारों द्वारा सूर्यफूल के बीजवाली तथाकथित पर्यावरण पूरक श्री गणेशमूर्ति !

पर्यावरणरक्षा के नाम पर पेड का बीज रखकर मूर्ति सिद्ध करना अशास्त्रीय है । श्री गणेशमूर्ति का पूजन कर उसमें विद्यमान चैतन्य का लाभ प्राप्त करना तथा चैतन्यमय मूर्ति को बहते पानी में विसर्जन कर दूर-दूर तक पर्यावरण में वह चैतन्य पहुंचाना, वास्तव में इस धर्माचरण से ही पर्यावरण की रक्षा हो सकती है !

(यह छायाचित्र प्रकाशित करने के पीछे लोगों की धार्मिक भावना आहत करने का नहीं है, उन्हें वस्तुास्थिति ध्यान में आए, इस उद्देश्य से यह प्रकाशित किया है । – संपादक, दैनिक सनातन प्रभात)

मुंबई – धारावी तथा परळ के कुछ मूर्तिकार पर्यावरण के नाम पर विघटन होने के लिए सक्षम (‘बायोडिग्रेडेबल’) श्री गणेशमूर्ति सिद्ध कर रहे हैं । यह मूर्ति सिद्ध करते समय सिद्ध किए गए मोल्ड में लाल मिट्टी तथा खत रखा जाता है । उसमें सूर्यफूल का बीज डाला जाता है । यह मूर्ति बनाकर कुंडी में रखी जाती है । कुछ दिनों के पश्चात उस मूर्ति में से अंकुर ऊपर आ सकता है ।

 

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