परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी की प्रेरणा से विदेश में चल रहा अध्यात्मप्रसार का कार्य

परात्पर गुरु डॉ. आठवले द्वारा संकल्पित
तक्षशिला और नालंदा तुल्य भावी ‘महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय’ !

पूरे संसार में भौतिक शिक्षा देनेवाले अनेक विद्यापीठ हैं, परंतु परिपूर्ण अध्यात्मशास्त्र और ईश्‍वरप्राप्ति की शिक्षा देनेवाला एक भी विद्यापीठ नहीं है । इसलिए २२.३.२०१४ को परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी ने गोवा में ‘महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय’ स्थापित किया है । यह इस प्रकार का विश्‍वविद्यालय निर्माण करेगा । तक्षशिला और नालंदा जैसे प्राचीन विद्यापीठों के तुल्य बननेवाला यह भावी विश्‍वविद्यालय १४ विद्या और ६४ कला, तथा अध्यात्म की उच्च शिक्षा एवं आध्यात्मिक शोध हेतु कार्यरत रहेगा ! इस विषय में वर्ष २०१५ मेें Spiritual.University यह जालस्थल भी कार्यान्वित किया गया है ।

महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय के शिक्षा की अद्वितीय विशेषता !

‘अध्यात्म विश्‍वविद्यालय’ के स्नातक ‘संत’ ही होंगे । उन्हें पृथक कागजी प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं होगी !’ – परात्पर गुरु डॉ. आठवले (वर्ष १९८९)

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी की प्रेरणा से विदेश में भी चल रहा अध्यात्मप्रसार का कार्य

देश-विदेश में शोधनिबंधों की प्रस्तुति

वर्ष २००७ से ‘महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय’ने ‘पिप’, ‘यूनिवर्सल थर्मो स्कैनिंग’ आदि वैज्ञानिक उपकरण, सूक्ष्म ज्ञान का परीक्षण इ. के आधार पर अध्यात्म की श्रेष्ठता सिद्ध करनेवाला शोध किया है । ऐसे १ सहस्र विषयों में से कुछ विषयों पर शोधनिबंध तैयार हुए हैं । वर्ष २०१२ से २५ अप्रैल २०१८ तक इन शोधनिबंधों की प्रस्तुति राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक परिषदों में कुल मिलाकर २५ हुई है ।

‘महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय’ कृत शोधनिबंध प्रस्तुत करते श्री. शॉन क्लार्क (वर्ष २०१६)

‘स्पिरिच्युअल साइन्स रिसर्च फाउंडेशन’ का अध्यात्मप्रसार तथा आध्यात्मिक शोधकार्य

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी की अध्यात्म संबंधी शिक्षा तथा आध्यात्मिक शोध से प्रेरित होकर विदेश के जिज्ञासुआें ने १४.१.२००६ को ‘स्पिरिच्युअल साइन्स रिसर्च फाउंडेशन’ की स्थापना की । यह संस्था ऑस्ट्रेलिया, यूरोप और अमेरिका में सक्रिय है तथा ‘SSRF.org’ के माध्यम से पूरे संसार में आध्यात्मिक शोधकार्य का प्रसार कर रही है । इसका उद्देश्य है – विविध पंथ और योगमार्ग से साधना करनेवालों का आध्यात्मिक उन्नति के विषय में मार्गदर्शन करना ।

अध्यात्म व साधना संबंधी मार्गदर्शन करते परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी (जुलाई २०१०)

‘एसएसआरएफ’ के साधकों द्वारा की गई आध्यात्मिक उन्नति

अप्रैल २०१८ तक ‘एसएसआरएफ’ के २० साधकों ने ६० प्रतिशत से अधिक आध्यात्मिक स्तर प्राप्त किया तथा ५ साधक संत बने । इसके माध्यम से सैकडों विदेशी, हिन्दू धर्म के अनुसार साधना करने लगे हैं

विदेश में हुई अंतरराष्ट्रीय परिषदों में महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय का सहभाग

महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय की स्थापना का उद्देश्य

१. ब्राह्मतेज तथा क्षात्रतेज की शिक्षा

धर्म, अध्यात्म, साधना इ. के विषय में शिक्षा देकर ब्राह्मतेज बढाया जाएगा । धर्माभिमान, राष्ट्रभक्ति की शिक्षा देकर क्षात्रतेज का वर्धन किया जाएगा ।

२. पूरे विश्‍व में सनातन धर्म का प्रसार

विविध वैज्ञानिक पद्धतियों व उपकरणों द्वारा विविध विषयों पर शोध कर रहा है ।

वर्ष २०२३ में स्थापित होनेवाला ‘हिन्दू राष्ट्र’ सहस्रों वर्ष तक बना रहे, इस हेतु ‘अध्यात्म विश्‍वविद्यालय’ धर्मसत्ता के लिए पूरक आध्यात्मिक बल प्रदान करेगा !

‘महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय’ के कार्य में योगदान के लिए अनुरोध !

‘महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय’ की निर्मिति, धर्मप्रसार का ही कार्य है । इसमें आप निम्नानुसार योगदान दे सकते हैं –

१. निर्माण-सामग्री (रेत, ईंटें,सीमेंट, पटिया (टाइल्स) इ.) विद्युत उपकरण, लकडी, नल-साजी (प्लंबिंग) इत्यादि दान करें !

२. निवास-उपयोगी वस्तुएं – फर्नीचर, बर्तन इत्यादि अर्पण करें !

३. ग्रंथालय हेतु साधना, संत-चरित्र, राष्ट्र इ. विषयों के ग्रंथ भेंट करें !

महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय को अनुदान देने के लिए संपर्क करें

पता : भगवतीकृपा अपार्टमेंट्स, एस-१, दूसरा माला, बिल्डिंग ‘ए’, ढवळी, फोंडा, गोवा ४०३ ४०१.

संपर्क क्रमांक : ८६००८६९६६६

इमेल आईडी : [email protected]

स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात 

 

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