नववर्ष (चैत्र-प्रतिपदा) पर धर्माधिष्ठित ‘हिन्दू राष्ट्र’ स्थापित करने का संकल्प करो !

(परात्पर गुरु) डॉ. आठवले

‘चैत्र-प्रतिपदा (गुडीपडवा) पृथ्वी पर युग के आरंभ का दिन है ! साढे तीन मुहूर्तों में एक, आज के दिन, नए कार्य का शुभारंभ किया जाता है । वर्तमान में, भारत में, धर्मनिरपेक्ष राज्य होने के कारण हमें सर्वत्र धर्मग्लानि का अनुभव हो रहा है । सनातन धर्म के साथ-साथ संस्कृति, वैदिक कालगणना, संस्कृत, गाय, गंगा, मंदिर आदि हिन्दू धर्म के प्रतीक संकट में हैं । ऐसे समय संस्कृतिप्रेमियों द्वारा किया जानेवाला सांस्कृतिक जागरण का आवाहन कि ‘नववर्ष ३१ दिसंबर की मध्यरात्रि में नहीं, चैत्रप्रतिपदा तिथि पर मनाएं’, महत्त्वपूर्ण होने पर भी, चिरस्थायी उपाय नहीं है । अनेक धर्मप्रेमी जन वर्ष २०१९ के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर, हिन्दू समाज में किसी एक राजनीतिक दल के पक्ष में राजनीतिक जागरण करने का विचार कर रहे हैं । परंतु, सच्चाई यह है कि धर्मग्लानि की स्थिति में इस चुनाव-प्रधान देश में प्रत्येक बार दुर्योधन के स्थान पर दुःशासन, दुःशासन के स्थान पर शकुनि और शकुनि के स्थान पर अश्‍वत्थामा चुने गए हैं, यह आजतक का अनुभव है । यदि धर्मग्लानि सचमुच दूर करनी है, तो ‘भारत में सनातन धर्म पर आधारित शासनतंत्र स्थापित करना होगा;’ क्योंकि यह चिरस्थायी उपाय है ।

यद्यपि हिन्दू धर्म में ग्लानि आई हुई है; परंतु हमारे धर्मग्रंथों में धर्म की पुनर्स्थापना का सिद्धांत दिया हुआ है । पुनश्‍च, धर्मसंस्थापना के लिए कार्य करना, काल की आवश्यकता और कालानुसार शुभकार्य ही है । हिन्दुओ, इस वर्ष की चैत्रप्रतिपदा (गुढीपाडवा) पर धर्माधिष्ठित हिन्दू राष्ट्र की स्थापना हेतु तन-मन-धन से कार्य करने का शुभसंकल्प करो और अगले ५ वर्ष में, अर्थात २०२३ तक भारत में हिन्दुआें का धर्मराज्य स्थापित कर, आगामी पीढियों के लिए नया इतिहास लिखो !’

– (परात्पर गुरु) डॉ. आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था