मध्यप्रदेश व उत्तरप्रदेश में ३१ दिसंबर पर होनेवाले अनाचार रोकने के लिए सनातन संस्था एवं हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा जनजागरण !

उज्जैन (मध्यप्रदेश) – नववर्ष का स्वागत करने के नाम पर आजकल पाश्‍चात्यों के बढते अंधानुकरण के कारण ३१ दिसंबर की मध्यरात्रि १२ बजे नववर्ष मनाया जाता है । रात को बडे आवाज के पटाखे जलाकर प्रदूषण करना, गानों की ताल पर अश्‍लील हाव-भाव करते हुए नाचना, लडकियों से छेडछाड करना, नशीले पदार्थों का सेवन आदि कुकृत्य किए जाते हैं । समाज और संस्कृति के लिए यह अत्यंत घातक है ।

भारतीय संस्कृति के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को नववर्ष मनाने के प्राकृतिक व आध्यात्मिक लाभ हैं । समाज में इस विषय में जागृति करने हेतु समिति द्वारा उज्जैन में ५ मंदिर, ६ विद्यालय एवं ३ महाविद्यालय, साथ ही वेदान्त समिति की ओर से तुलसीपूजन और गीता जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित व्याख्यान में तथा कथा भजन सम्मेलन में कुल मिलकर १००० पत्रक बांटे । यह पत्रक धर्माभिमानी श्री. पृथ्वीराज परमारजी ने प्रायोजित किए थे । देवास गेट बस स्टैंड पर फ्लेक्स के माध्यम से प्रबोधन भी किया गया ।

वाराणसी (उत्तरप्रदेश) – यहां के उदय प्रताप इंटर कॉलेज तथा सोनकली इंटरमीडिएट कॉलेज में सनातन संस्था के श्री. निलय पाठक ने भारतीय संस्कृति एवं परंपरा का महत्त्व तथा ३१ दिसंबर की मध्य रात्रि को होनेवाले विविध अनाचारों के कारण होनेवाली हानि के बारे में बताकर प्रबोधन किया । इसका लाभ २९०० विद्यार्थी तथा ९२ अध्यापकों ने लिया ।

स्रोत :  दैनिक सनातन प्रभात