गुरुकुल समान आश्रमों की निर्मिति !

गुरुकुल समान आश्रमों की निर्मिति !

साधकों को पूर्णकालीन साधना के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध हो, इसलिए परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी ने गुरुकुल समान आश्रमों की निर्मिति की है ।

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विविध संतों द्वारा किया गया परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी का सम्मान !

संत ही संतों को पहचान सकते हैं और वे ही अन्य संतों के कार्य का महत्त्व समझ सकते है । परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के आध्यात्मिक कार्य का महत्त्व ज्ञात होने से अनेक संतों ने परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी को सम्मानित एवं पुरस्कार देकर गौरवान्वित किया ।

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क्या है भृगु और रावण संहिता ?

सप्तर्षियों में श्रेष्ठ तथा ब्रह्मदेव के मानसपुत्र महर्षि भृगु व उनके पुत्र शुक्राचार्य में कैलाश पर्वत के भृगु क्षेत्र में हुआ संवाद देवताआें के गुरु बृहस्पति ने लिखकर रखा । इसी को भृगुसंहिता कहते हैं । यह संहिता सत्ययुग में लिखी गई है ।

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दीपावली मेले में सनातन भारतीय संस्कृति संस्था एवं सनातन संस्था द्वारा धर्मप्रसार !

दीपावली मेले में सनातन भारतीय संस्कृति संस्था एवं सनातन संस्था द्वारा धर्मप्रसार !

फरीदाबाद (हरियाणा) के बडखल लेक, फाल्कन रेस्टोरेंट के परिसर में चार दिवसीय दीपावली मेले में सनातन भारतीय संस्कृति की ओर से सात्त्विक सामग्री की प्रदर्शनी लगाई ।

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चैत्र मास में महर्षि भृगु के बताए अनुसार आगे दिया हुआ नामजप करें !

महर्षि भृगु ने सनातन के साधकों को चैत्र माह में (२८ मार्च से २६ अप्रैल २०१७ इस कालावधि में) आगे दिए गए नामजप करने को बताया है । यह नामजप प्रतिदिन आते-जाते करें ।

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कठिन परिस्थितिका अथवा समस्याका सामना करते समय भगवान श्रीकृष्णके उपरनेके पीछे छिपकर आश्रय लेना

कठिन परिस्थितिका अथवा समस्याका सामना करते समय भगवान श्रीकृष्णके उपरनेके पीछे छिपकर आश्रय लेना

इस चित्रमें भगवान श्रीकृष्णद्वारा धारण किए उपरनेका एक छोर बालभावयुक्त साधिकाद्वारा हठपूर्वक नीचे भूमितक खींचना और इसीसे श्रीकृष्णसे उसकी निकटता स्पष्ट होती है ।

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श्री गणेशकी पूजा पूरे भावसे करें, यह भगवान श्रीकृष्णद्वारा सिखाना

श्री गणेशकी पूजा पूरे भावसे करें, यह भगवान श्रीकृष्णद्वारा सिखाना

‘गणेशचतुर्थीके दिन भगवान श्रीकृष्ण मुझे सिखा रहे हैं कि श्री गणेशजीकी पूजा भावपूर्णरीतिसे कैंसे करनी चाहिए ।

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चित्रके विषयमें मनमें किसी भी प्रकारकी मूर्त (स्पष्ट) कल्पना न होते हुए भी श्रीकृष्णने ऊपर उठाया है, ऐसा चित्र साकार होना

चित्रके विषयमें मनमें किसी भी प्रकारकी मूर्त (स्पष्ट) कल्पना न होते हुए भी श्रीकृष्णने ऊपर उठाया है, ऐसा चित्र साकार होना

अंतर्राष्ट्रीय ख्याति के सम्मोहन उपचार विशेषज्ञ परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी ने २४ मार्च १९९९ को सनातन संस्था की स्थापना की । उन्होंने शीघ्र ईश्‍वरप्राप्ति के लिए गुरुकृपायोग बताया ।

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श्रीमती उमा रविचंद्रन् द्वारा बनाए व्यष्टि और समष्टि भाव दर्शानेवाले चित्र एवं उन चित्रोंकी विशेषताएं

साधनापथपर मार्गक्रमण करते समय साधककी साधना एक स्तरतक बढनेपर उसका ईश्वरके प्रति भाव जागृत होता है । ईश्वरकी ओर देखनेका दृष्टिकोण साधकके भावानुरूप भिन्न होता है, उदा. अर्जुनका भगवान श्रीकृष्णके प्रति सख्यभाव, हनुमानजीका दास्यभाव आदि ।

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