परात्पर गुरु श्री श्री जयंत बाळाजी आठवलेजी के अमृतमहोत्सव के उपलक्ष्य में संत एवं मान्यवरोंद्वारा दिए गए संदेश एवं अभिप्राय !

परात्पर गुरु श्री श्री जयंत बाळाजी आठवलेजी के अमृतमहोत्सव के उपलक्ष्य में मैं उनके लिए निरोगी दीर्घायु का चिंतन करता हूं, साथ ही सनातन संस्था को भी शुभकामनाएं देता हूं। समाज को धर्मशिक्षा देने का सनातन संस्था का कार्य प्रशंसनीय है।

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परात्पर गुरु श्री श्री जयंत बाळाजी आठवलेजी को दीर्घायु प्राप्त होने हेतु श्रीराम सेना की ओर से धारवाड (कर्नाटक) में ‘महामृत्युंजय याग’ !

परात्पर गुरु श्री श्री जयंत बाळाजी आठवलेजी को दीर्घायु प्राप्त हो; इसके लिए उनके अमृतमहोत्सव के उपलक्ष्य में श्रीराम सेना की ओर से १८ मई को ‘महामृत्युंजय याग’ एवं ‘श्रीराम तारक होम’ किए गए।

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प्रभु श्रीराम के रूप में अवतरे परात्पर गुरु श्री श्री जयंत आठवलेजी का अमृतमहोत्सवी भावस्पर्शी समारोह !

अमृतमहोत्सव समारोह का दूसरा दिन १९ मई को संपन्न हुआा। समारोह के पहले दिन परात्पर गुरुमाउली के श्रीकृष्ण रूप दर्शन का अनुभव करने के कारण पृथ्वीतल के भाग्यशाली जिवों ने अपनी हर सांस उनके चरणों में कृतज्ञता के रूप में व्यक्त करने का मन ही मन निश्‍चय किया।

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श्रीकृष्णजी के रूप में अवतरित परात्पर गुरु श्री श्री जयंत बाळाजी आठवलेजी का अमृतमहोत्सव भावपूर्ण वातावरण में संपन्न !

जेष्ठ कृष्ण सप्तमी की पावन तिथि को अर्थात १८ मई को सनातन के रामनाथी आश्रम में आयोजित शंख-चक्रधारी श्रीकृष्णजी के रूप में अवतरित परात्पर गुरु श्री श्री जयंत बाळाजी आठवलेजी के अमृत महोत्सव को पृथ्वीतलपर स्थित भाग्यशाली जिवों ने अनुभव किया ।

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एलोपैथी की औषधियां लेकर भी ठीक न होनेवाले पेट के विकार आयुर्वेदिक उपचारों से कुछ ही दिनों में पूर्णत: ठीक होना

६ माह एलोपैथी की औषधियां लेकर भी अपचन दूर न होना पिछले १ वर्ष से मुझे अपचन की समस्या है । इस कारण पेट में वायु (गैस) होना, बहुत भूख लगना, अनावश्यक खाना, इस प्रकार के कष्ट होने लगे ।

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हिन्दू राष्ट्र की (सनातन धर्म राज्य की) की स्थापना के लिए उच्च लोकों से पृथ्वी पर जन्मे दैवी बालक एवं युवा साधक !

हिन्दू राष्ट्र चलाने हेतु साधक ही योग्य हैं; क्योंकि उनमें सामान्य की तुलना में सत्त्वगुण अधिक होता है ।

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अध्यात्म में सर्वाेच्च पद पर विराजमान होते हुए भी अखंड शिष्यावस्था में रहनेवाली महान विभूति !

प.पू. डॉक्टरजी परात्पर गुरु के सर्वाेच्चपद पर विराजमान हैं । इतनी उच्च स्थिति में होते हुए भी प.पू. डॉक्टरजी ने अपना शिष्यत्व बनाए रखा है । उनके अनेक कृत्यों से यह सीखने को मिलता है । इनमें से कुछ उदाहरण आगे दे रहे हैं ।   १. मिलने आए संतों के सामने भी शिष्यभाव में

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गोवा में जून २०१७ में षष्ठ ‘अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशन’ !

हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा १४ से १७ जून २०१७ की अवधि में षष्ठ ‘अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशन’ का आयोजन किया गया है ।

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परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी का अद्वितीय ग्रंथकार्य (परिचय एवं विशेषताएं)

‘परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के गुरु सन्त भक्तराज महाराजजी ने उनसे एक बार कहा था, ‘‘मेरे गुरु ने मुझे आशीर्वाद दिया था कि तू किताबों पर किताबें लिखेगा ।’ किन्तु मैं भजन का एक ही ग्रन्थ लिख पाया । वह आशीर्वाद मैं आपको देता हूं ।

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सनातन संस्था के आश्‍चर्यजनक कार्य के साथ है, सूक्ष्म के जानकार संतों व ऋषियों का आशीर्वाद !

बडे-बडे संतों की संस्थाआें की तुलना में सनातन संस्था को अत्यल्प लोग जानते हैं । यह है सनातन संस्था का स्थूल परिचय । सूक्ष्म स्तर पर सनातन की स्थिति यह है ।

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