Category Archives: अध्यात्म

सनातन के १ सहस्र साधकों का ६१ प्रतिशत आध्यात्मिक स्तर प्राप्त कर संतत्व की दिशा में मार्गक्रमण !

हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के लिए समाज का सत्त्वगुण बढना आवश्यक है । १ सहस्र साधकों ने आध्यात्मिक उन्नति की, जिसका आध्यात्मिक परिणाम समाज की सात्त्विकता बढने में होगा और इस माध्यम से हिन्दू राष्ट्र की स्थापना का मार्ग सुगम होगा । धन्य हैं परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी और धन्य है उनके द्वारा बताया गया गुरुकृपायोग साधना का मार्ग !’

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आपातकाल में सुरक्षित रहने के लिए साधना बढाकर ईश्‍वर के असीम भक्त बनो !

‘वर्तमान धर्मनिरपेक्ष (अधर्मी) राज्यप्रणाली के कारण आज का समाज धर्माचरण से दूर हो गया है । इसलिए राष्ट्र और धर्म पर अनेक संकट आ रहे हैं । विश्‍व में अनाचार और अनैतिकता दिनोदिन बढ रही है, विविध प्रकार की प्राकृतिक आपदाएं बढ रही हैं और युद्ध-जैसी परिस्थितियां उत्पन्न हो रही हैं ।

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नामजप संबंधी शंकानिरसन

‘नाम’ साधना की नींव है । ३३ करोड देवी-देवताओं में से कौन-सा जप करना चाहिए, नामजप में आनेवाली बाधाएं, गलत धारणाएं इत्यादि के विषय में प्रायोगिक प्रश्नोत्तर इसमें दिए हैं ।

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कष्ट संबंधी शंकानिरसन

कष्ट संबंधी शंकानिरसन

साधना करते हुए सूक्ष्म की विविध शक्तियां साधक को कष्ट देती हैं । उसे साधना के परमार्थ पथ से परावृत्त करने हेतु वे प्रयत्नरत होते हैं । इस पर कौन-सा उपाय करें इत्यादि के विषय के प्रश्नोत्तर प्रस्तुत स्तंभ में अंतर्भूत हैं ।

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कर्मकांड संबंधी शंकानिरसन

कर्मकांड संबंधी शंकानिरसन

कर्मकांड साधना का प्राथमिक परंतु अविभाज्य भाग है । कर्मकांड में पालन करने योग्य विविध नियम, आचरण कैसे होना चाहिए, इस विषय में अनेक लोगों को जानकारी होती है; परंतु उसके पीछे का कारण और शास्त्र के विषय में हम अनभिज्ञ होते हैं ।

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अध्यात्मसंबंधी शंकानिरसन

अध्यात्मसंबंधी शंकानिरसन

गांव-गांव के जिज्ञासु और साधकों के मन में सामान्य तौर पर निर्माण होनेवाली अध्यात्मशास्त्र के सैद्धांतिक और प्रायोगिक भाग की शंकाओं का निरसन सनातन संस्था के प्रेरणास्रोत प.पू. डॉ. जयंत आठवलेजी ने किया है ।

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गुरुकृपायोगानुसार साधना के प्रकार

इस लेख में गुरुकृपायोगानुसार साधना की व्यष्टि साधना और समष्टि साधना के विषय में जान लेंगे । व्यष्टि साधना अर्थात् व्यक्तिगत आध्यात्मिक उन्नति हेतु किए जानेवाले प्रयत्न । समष्टि साधना अर्थात् समाज की आध्यात्मिक उन्नति हेतु किए जानेवाले प्रयत्न ।

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देवालय का महत्त्व

प्रत्यक्ष ईश्वरीय ऊर्जा के आकर्षण, प्रक्षेपण एवं संचारण के केंद्र होते हैं ‘देवालय’ । इसलिए देवालय से ईश्वरीय ऊर्जा निरंतर आकर्षित होती है तथा उसका प्रक्षेपण सर्व दिशाओं में होता है ।

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नामजप के लाभ

ईश्वर का नाम, साधना की नींव है । अपने जीवन में नामजप से शारीरिक एवं मानसिकदृष्टि से क्या-क्या लाभ होते हैं, यह देखेंगे ।

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