Category Archives: हिंदु धर्म

पाताल तक जाता है इस शिवलिंग पर चढाया गया जल, यहां लक्ष्मण को दिए थे महादेव ने दर्शन !

भगवान शिव के कई प्राचीन मंदिर अत्यंत रहस्यमय भी हैं। छत्तीसगढ़ के खरौद नगर में स्थित एक प्राचीन मंदिर में जिस शिवलिंग की पूजा की जाती है, उसके बारे में मान्यता है कि यहां से एक मार्ग पाताल तक जाता है।

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जगन्नाथ पुरी मंदिर की अाश्चर्यचकित करनेवाली कुछ खास बातें !

कहा जाता है कि मंदिर में बनने वाला प्रसाद ७ बर्तनों में बनता है, यह खाना एक के ऊपर दूसरे बर्तन को रखकर बनाया जाता है। अाश्चर्य की बात यह है कि सबसे पहले खाना सबसे ऊपर रखे बर्तन में बनता है और उसके बाद यह क्रम नीचे की आेर चलता है।

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सावधान मित्रो, यदि खाने-पीने की वस्तुआें के पैकेटों पर निम्नांकित कोड लिखे हैं, तो उसमें ये चीजें मिली हुई हैं –

सावधान मित्रो, यदि खाने-पीने की वस्तुआें के पैकेटों पर निम्नांकित कोड लिखे हैं, तो उसमें ये चीजें मिली हुई हैं – EE 322 – गाय का मांस

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गाय के चमडे से बननेवाले क्रिकेट की गेंद का बहिष्कार करें !

क्रिकेट भारतीय खेल नहीं है; इसलिए हम उसका विरोध नहीं करना चाहते । केवल गेंद के लिए अन्य चमडा मिल जाए तो हमें कोई आपत्ति नहीं होगी, ऐसा शंकराचार्य स्वामी निश्‍चलानंद सरस्वती गुरुजी का कहना है । उनका कहना है कि रॉकेट और संगणक का शोध करनेवालों के लिए यह असंभव नहीं है ।

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गोसंवर्धन (जैविक कृषि एवं पंचगव्य चिकित्सा के लाभ सहित)

प्राचीन काल में भारत में प्रत्येक घर में एक गाय होती थी । इसलिए संपूर्ण भारत रोगमुक्त एवं आर्थिक दृष्टि से समृद्ध था । गोमाता का महत्त्व समझने के लिए पढिए सनातन का नूतन ग्रंथ परिवार एवं देश की समृद्धि हेतु उपाय !

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चैतन्यमयी गोदुग्ध, घी, गोमय एवं गोमूत्र का उपयोग कर विदेश में जानेवाला धन बचाएं !

गोसेवा से संतान प्राप्त होती है । गोबर का उपयोग खाद के रूप में करने से अन्नरूपी लक्ष्मी की प्राप्ति होती है । केवल दूध-घी ही नहीं; अपितु गोमूत्र भी आरोग्यदायी और रोगनाशक है ।

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गोपियुष : सुदृढ मानवीय शरीर हेतु ईश्‍वरप्रदत्त अनमोल देन !

गोपियुष अर्थात प्रसूती पश्‍चात ४८ से ७२ घंटों में गाय द्वारा प्राप्त प्रथम दूध । गोपियुष और माता द्वारा प्राप्त पियुष में वैज्ञानिक दृष्टि से बहुत सी समानता पाई गई है । गोपियुष में रोगप्रतिकारक शक्ति और शरीर की सुदृढता के लिए आवश्यक ९० से अधिक पोषकतत्त्व हैं । गोपियुष सुदृढ मानवीय शरीर हेतु ईश्‍वरप्रदत्त अनमोल देन है ।

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भारतीय गाय (देशी गाय) और विदेशी गाय (जर्सी गाय)

कहते हैं जैसा बीज होता है, वैसा ही फल मिलता है । भारत संसार का सर्वाधिक सात्त्विक देश है । यह गुणधर्म यहां के प्रत्येक प्राणीमात्र में आता ही है । इसलिए भारतीय गाय विदेशी गाय से अधिक सात्त्विक है ।

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यहां जब भी मुसीबत आने वाली होती है मूर्ति से बहने लगते हैं आंसूू

देवभूमि के नाम से विख्यात इस प्रदेश में देवी देवताओं से कई रोचक बातें भी जुड़ी हुई हैं। ऐसी ही एक रोचक कड़ी शक्तिपीठों में से एक बज्रेश्वरी देवी माता मंदिर कांगड़ा से भी जुड़ी है। इस मंदिर में देवी के साथ भगवान भैरव की भी एक चमत्कारी मूर्ति है।

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