Category Archives: हिन्दू धर्म

खगोलशास्त्र और फलज्योतिषविज्ञान में अद्भुत शोध करनेवाले आचार्य वराहमिहिर के जन्मस्थान के प्रति मध्यप्रदेश सरकार की घोर उपेक्षा !

बताया जाता है कि आचार्य वराहमिहिर का जन्म ५ वीं शताब्दी में हुआ था । जोधपुर के ज्योतिषाचार्य पं. रमेश भोजराज द्विवेदी की गणनानुसार वराहमिहिर का जन्म चैत्र शुक्ल दशमी को हुआ था । वराहमिहिर का घराना परंपरा से सूर्योपासक था ।

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क्या है भृगु और रावण संहिता ?

सप्तर्षियों में श्रेष्ठ तथा ब्रह्मदेव के मानसपुत्र महर्षि भृगु व उनके पुत्र शुक्राचार्य में कैलाश पर्वत के भृगु क्षेत्र में हुआ संवाद देवताआें के गुरु बृहस्पति ने लिखकर रखा । इसी को भृगुसंहिता कहते हैं । यह संहिता सत्ययुग में लिखी गई है ।

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हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के संदर्भ में परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी का विचारधन !

भारत में वर्ष २०२३ में ईश्‍वरीय राज्य अर्थात हिन्दू राष्ट्र स्थापित होगा । यह आज तक अनेत संतों ने समय-समय पर बताया है । काल की पदचाप (आहट) पहले ही सुन लेनेवाले संतों ने, हिन्दू राष्ट्र रूपी उज्ज्वल भविष्य देख लिया है । अब उस दिशा में प्रयत्न करना, हमारी साधना है ।

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महर्षि ने सद्गुरु (श्रीमती) अंजली गाडगीळ की दैवी यात्रा और आगामी प्राकृतिक आपदाआें के संदर्भ में बताए सूत्र

‘सनातन की सद्गुरु (श्रीमती) अंजली गाडगीळ पिछले ४ वर्षों से सप्तर्षि जीवनाडी में बताए स्थानों पर जाती हैं । हिन्दू राष्ट्र की (सनातन धर्म राज्य की) स्थापना शीघ्र हो, राष्ट्र, धर्म तथा साधकों की रक्षा हो और देवताआें के आशीर्वाद प्राप्त हो, इस दृष्टि से उनकी यह यात्रा जारी है ।

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पाकिस्तान में है भक्त प्रल्हाद का मंदिर, जहां हुई थी होली की शुरुआत !

भक्त प्रल्हाद ने भगवान नृसिंह के सम्मान में एक मंदिर बनवाया था जो वर्तमान में पाकिस्तान स्थित पंजाब के मुल्तान शहर में है। इसे प्राचीनकाल में श्रीहरि के ‘भक्त प्रल्हाद का मंदिर’ के रूप में जाना जाता था। इस मंदिर का नाम प्रल्हादपुरी मंदिर है।

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भारत श्रीयंत्रांकित राष्ट्र होने के कारण भारत को आध्यात्मिक दृष्टि से प्राप्त वैभव !

हमारा भारत देश आरंभ से ही ‘श्रीयंत्रांकित’ है ! उपर का त्रिकोण हिमालय, अरवली एवं सातपुडा पर्वतों से मिलाकर बना है। विंध्य पर्वत नीव होनेवाला तथा बाजू की दो पूर्वघाटियां एवं पश्‍चिम घाटी को मिलाकर नीचला त्रिकोण बना है।

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महर्षि भृगु ने भृगु संहिता वाचक भृगुशास्त्री डॉ. विशाल शर्माजी के माध्यम से, सनातन के रामनाथी आश्रम में हुए फलादेश द्वारा कथित किए परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी और सनातन संस्था संबंधी सूत्र

महर्षि भृगु ने बताया कि ‘ मैंने फलादेश के समय ४२ मिनट विश्राम करने के लिए कहा । उस कालावधि में भगवान शिवजी उपस्थित हुए । भगवान शिवजी के आशीर्वाद इन महान परम परमेष्टियों तथा सनातन संस्था के सभी साधकों को प्राप्त हुए हैं । ‘

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सनातन आश्रम परिसर में मूर्ति-स्थापना का उद्देश्य

महर्षि ने बुधवार ८.२.२०१७ को सवेरे रामनाथी आश्रम के परिसर में तनोटमाता और त्रिनेत्र गणेश की स्थापना करने के लिए कहा । ‘पू. डॉ. ॐ उलगनाथन्जी के माध्यम से महर्षि ने संदेश दिया, ‘ यह वर्ष परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी का अमृत महोत्सवी वर्ष है ।

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देहली के सनातन के सेवाकेंद्र में भी भृगु संहिता का शुभागमन !

होशियारपुर, पंजाब के भृगु संहिता वाचक भृगुशास्त्री डॉ. विशाल शर्मा का ९.२.२०१७ को सनातन के सेवाकेंद्र में आगमन हुआ । हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक पू. डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी ने भृगुसंहिता का पूजन किया ।

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महर्षि जी के आदेशानुसार रामनाथी, गोवा के सनातन आश्रम परिसर में राजस्थान की श्री तनोटमाता, श्री त्रिनेत्र गणेश की मूर्ति एवं उत्तराखंड की व्यासशिला की स्थापना !

सप्तर्षि जीवनाडी के माध्यम से मार्गदर्शन करनेवाले महर्षि के आदेशानुसार सनातन संस्था के रामनाथी आश्रम के परिसर में ८.२.२०१७ को श्री तनोटमाता और श्री त्रिनेत्र गणेश की मूर्तियों की स्थापना की गई ।

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