Category Archives: त्यौहार, उत्सव और व्रत

श्री गणेश चतुर्थी : भाद्रपद शुक्ल पक्ष ४ (५ सितंबर)

जिस दिन श्री गणेश तरंगें प्रथम बार पृथ्वी पर आईं अर्थात जिस दिन गणेशजन्म हुआ, वह दिन था माघ शुक्ल चतुर्थी । उसी दिन से श्री गणपति का चतुर्थी से संबंध स्थापित हुआ ।

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चातुर्मास का महत्त्व

चातुर्मास को उपासना एवं साधना हेतु पुण्यकारक एवं फलदायी काल माना जाता है । आषाढ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक अथवा आषाढ पूर्णिमा से कार्तिक पूर्णिमा तक चार महीने के काल को चातुर्मास कहते हैं । यह एक पर्वकाल है ।

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भगवान श्रीकृष्ण की विशेषताएं एवं कार्य

भगवान श्रीकृष्ण की विशेषताएं एवं कार्य

श्रीकृष्ण द्वारा बताया हुआ तत्त्वज्ञान गीता में दिया है । उन्होंने अपने तत्त्वज्ञान में प्रवृत्ति (सांसारिक विषयों के प्रति आसक्ति) एवं निवृत्ति (सांसारिक विषयों के प्रति विरक्ति) के बीच योग्य संयोजन दर्शाया है ।

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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के निमित्त

गोकुलाष्टमी की तिथि पर श्रीकृष्ण का तत्त्व पृथ्वी पर नित्य की तुलना में १००० गुना अधिक कार्यरत होता है । इस तिथि पर गोकुलाष्टमी का उत्सव मनाने तथा ॐ नमो भगवते वासुदेवाय । नामजप आदि उपासना भावपूर्ण रूप से करने पर नित्य की तुलना में अधिक मात्रा में कार्यरत कृष्णतत्त्व का लाभ मिलता है ।

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नववर्ष १ जनवरी को नहीं, अपितु चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ही मनाएं !

३१ दिसंबर अर्थात स्वैराचार का अश्‍लील प्रदर्शन ! इससे सभ्यता और नैतिकता का अवमूल्यन होकर वृत्ति अधिकाधिक तामसिक बनती है । राष्ट्र की युवा पीढी राष्ट्र एवं धर्म का कार्य करना छोडकर रेन डांस, पार्टियां और पब की दिशा में झुक जाती है !…

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श्री लक्ष्मी पूजाविधि

आश्विन अमावस्या, अर्थात लक्ष्मीपूजन के दिन सर्व मंदिरों, दुकानों तथा घरों में श्रीलक्ष्मीपूजा की जाती है । यहां, इस पूजा की सरल भाषा में शास्त्रीय जानकारी दी है ।

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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पूजाविधि

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पूजाविधि

भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करना श्रावण कृष्ण पक्ष अष्टमी को भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ । यह दिन श्रीकृष्णजयंती के रूप में मनाया जाता है । प्रस्तुत लेख में श्रीकृष्ण की पूजाविधि दी है । पूजा के मंत्रों का अर्थ समझ में आने पर, भगवान श्रीकृष्ण की पूजा अधिक भावपूर्ण होने में सहायता होती है

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