महर्षि की कृपा से सनातन के साधकों को मिला श्री अन्नपूर्णादेवी का आशीर्वाद !

‘परा’ पात्र में चावल डालते हुए परात्पर गुरु डॉ. आठवले
‘परा’ पात्र में चावल डालते हुए परात्पर गुरु डॉ. आठवले

आशीर्वाद के रूप प्राप्त परा पात्र में चावल

डालकर सनातन के आश्रम में हुई विशेष पूजा !

रामनाथी, गोवा – प्रभु श्रीराम तथा परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवलेजी की राशि मकर है । २३ सितंबर को भी मकर राशि थी । इसलिए २३ सितंबर को रामनाथी, गोवा के सनातन आश्रम में विशेष पूजा हुई । नाडी-पट्टिका के माध्यम से महर्षि ने जो बताया, उसी के अनुसार यह पूजा की गई । केरल में कोची नगर के पास स्थित छोटानिखारा गांव के श्री भगवतीदेवी के मंदिर से आशीर्वादस्वरूप यह परा पात्र मिला । इस पात्र में परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी ने अपने हाथ से एक मुट्ठी चावल छोडा । पश्‍चात, मंत्रोच्चार के साथ इसकी पूजा की गई ।

        भृगु महर्षि ने कहा है, इस पूजा से आपातकाल में साधकों को अन्न सहित धन भी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध रहेगा । महर्षि की आज्ञानुसार इस परा पात्र में परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी ने एक दिन मुट्ठीभर चावल डाला । पश्‍चात, प्रतिदिन एक मुट्ठी चावल सद्गुरु (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळ डाल रही हैं । यह परा पात्र आश्रम के अन्नपूर्णाकक्ष में रखा गया है । महर्षि ने कहा है कि एक महीने में अथवा जब यह पात्र चावल से भर जाए, तब इस चावल में गुड मिलाकर खीर बनाएं और सब साधकों को खिलाएं । ऐसा करने से साधकों को श्री अन्नपूर्णादेवी का आशीर्वाद मिलेगा और आगे आपातकाल में भी साधकों के लिए अन्न अल्प नहीं पडेगा । महर्षि साधकों को अलग-अलग माध्यम से आशीर्वाद दिलवा रहे हैं; इसलिए साधकों ने इस विषय में कृतज्ञता व्यक्त की है ।

क्या है भृगु संहिता ?

        ब्रह्मदेव के मानसपुत्र महर्षि भृगु व उनके पुत्र शुक्राचार्य में कैलाश पर्वत के भृगु क्षेत्र में हुआ संवाद देवताआें के गुरु बृहस्पति ने लिखकर रखा । इसी को ‘भृगु संहिता’ कहते हैं । सत्ययुग में लिखी गई इस संहिता के ३ लाख पृष्ठ है । गुरु के निर्वाण के उपरांत गुरुपत्नी ने मुझे ये हस्तलिखित दिए । तब से मैं इन हस्तलिखितों में बद्ध भविष्य बता रहा हूं । – पं. लालदेव शास्त्री होशियारपुर, पंजाब.

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